बहु से दुष्कर्म करने वाला चाचा ससुर दोषी साबित, अदालत ने सुनाई दस साल की सश्रम कारावास की सजा
September 1, 2025चंद्रभान यादव जशपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले जशपुर में एक शख्स ने अपनी बहू के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया. इस केस में जशपुर जिला अदालत ने तीन साल के अंदर फैसला सुनाया है. पूरी घटना 13 अगस्त 2022 की है. जशपुर जिला कोर्ट ने इस केस में फैसला सुनाते वक्त रामचरित मानस के श्लोक को पढ़कर सुनाया. न्यायाधीश जनार्दन खरे ने कहा कि महिला की अस्मिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अदालत ने दोषी चाचा ससुर को 10 साल सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड की कठोर सजा सुनाई. अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त एक साल साधारण कारावास भुगतना होगा. कोर्ट ने यह फैसला 22 अगस्त 2025 को सुनाया.
रिश्तों की मर्यादा भंग करने वाला व्यक्ति समाज के लिए कलंक: कोर्ट में फैसला सुनाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे ने विशेष रूप से गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस के श्लोक को पढ़ा. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने रिश्तों की मर्यादा भंग करता है, वह केवल परिवार नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए कलंक है. ऐसे अपराधियों को कठोर सजा देना ही इंसाफ है।
जानिए कोर्ट में किस श्लोक को पढ़ा गया: अनुज बधू भगिनी सूत नारी, सुनु सठ कन्य सम ए चारी, इन्हहि कुदृष्टि बिलोकई जोई, ताहि बधें कुछ पाप न होई. अदालत में पढ़े गए इस श्लोक का अर्थ है कि हे मूर्ख! छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्रवधू और कन्या ये चारों समान हैं. इन्हें जो भी बुरी दृष्टि से देखता है, उसका वध करना भी पाप नहीं है।
रामचरित मानस में सामाजिक मर्यादा का संदेश है: कोर्ट ने इस श्लोक का उल्लेख कर यह स्पष्ट कर दिया कि रामचरित मानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सामाजिक मर्यादा और आचरण का भी शाश्वत संदेश है. अदालत ने इस श्लोक को पढ़कर यह बताने की कोशिश की कि स्त्रियों की गरिमा और रिश्तों की पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों को समाज कभी क्षमा नहीं कर सकता.
ससुर ने किया था दुष्कर्म: लोक अभियोजक अनुपम तिर्की ने बताया कि पीड़िता ने 13 अगस्त 2022 को पंड्रापाठ चौकी थाना बगीचा में शिकायत दर्ज कराई थी. उसने बताया था कि 12 अगस्त को जब उसका पति काम पर बाहर गया हुआ था, वह धान रोपाई में लगी चोट के कारण घर पर आराम कर रही थी. तभी आरोपी, जो रिश्ते में उसका चाचा ससुर है, जबरन कमरे में घुस आया और दुष्कर्म करने लगा।
पड़ोसियों ने बचाई महिला की अस्मत: पीड़िता के शोर मचाने पर उसकी नाबालिग बेटी सहायता के लिए बाहर भागी और पड़ोसियों को लेकर लौटी. पड़ोसियों ने आकर पीड़िता को आरोपी के चंगुल से मुक्त कराया.
पुलिस ने तेजी से की जांच: पीड़िता की शिकायत पर बगीचा थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 450 के तहत केस दर्ज किया. यह धाराएं दुष्कर्म के केस में लगाई जाती है. उसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया. पुलिस ने इस केस में चार्जशीट भी तय समय में पेश किया था.
अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों और सबूतों का परीक्षण किया. दोष सही पाए जाने पर कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ कठोर सजा सुनाई. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध परिवार और समाज दोनों की मर्यादा को चकनाचूर करते हैं. दोषियों को कठोर दंड देकर ही समाज में यह संदेश दिया जा सकता है कि स्त्रियों की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई नरमी नहीं होगी.
आरोपी को मिली कठोर सजा: लोक अभियोजक अनुपम तिर्की ने बताया कि दुष्कर्म के मामले में आरोपी चाचा ससुर को न्यायाधीश जनार्दन खरे की कोर्ट ने सजा सुनाई है. आरोपी को दस साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है. इस फैसले की चर्चा हर ओर हो रही है. इस फैसले ने पूरे समाज में यह बात स्पष्ट कर दी है कि रिश्तों की मर्यादा को तार तार करने वालों को किसी हाल में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।



