लालपुर शराब कांड में बड़ा एक्शन, मिलावटी शराब, 12 लाख कैश गायब, अधिकारी निलंबित – BIS कंपनी के फरार कर्मचारी अब भी बाहर
June 25, 2025
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्थित लालपुर की सरकारी शराब दुकान से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आने के बाद राज्य का आबकारी विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। यहां से बिना होलोग्राम और मिलावटी शराब की 300 पेटियां जब्त की गई थीं, साथ ही करीब 12 लाख रुपये नकद भी गायब मिले थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाके के सहायक आबकारी आयुक्त (ADEO) राजेंद्र नाथ तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
विशेष सचिव आबकारी ने जारी किया निलंबन आदेश
जांच में राजेंद्र नाथ तिवारी के विरुद्ध गंभीर श्रेणी की अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद विशेष सचिव आबकारी विभाग ने उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया। यह कार्रवाई सरकार की छवि पर लगे दाग को साफ करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
BIS कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?
इस पूरे प्रकरण में ठेका संचालन करने वाली BIS कंपनी की भूमिका सबसे संदिग्ध है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अब तक BIS के खिलाफ कोई सीधी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है। इससे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कंपनी के 4 कर्मचारी फरार, FIR के बावजूद गिरफ्तारी नहीं
BIS कंपनी का सुपरवाइज़र और तीन सेल्समैन इस मामले में मुख्य आरोपी हैं, जो घटनास्थल से फरार हो गए।
इन फरार कर्मचारियों के खिलाफ एक FIR आबकारी विभाग में और दो FIR टिकरापारा थाना में दर्ज हैं।
बावजूद इसके, अब तक इनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई, जिससे विभाग की कार्यशैली पर जनता और मीडिया का भरोसा डगमगाने लगा है।
संविधान हत्या दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हुए शामिल, लोकतंत्र को जीवित रखने एवं सशक्त करने के लिए जन-जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य
जवाबदेही तय होगी या फिर से दब जाएगा मामला?
लालपुर प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी नियंत्रण में संचालित शराब दुकानों में भी मिलावट, नकली स्टॉक और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं?
सरकार और विभाग पर अब यह जिम्मेदारी है कि वो न सिर्फ घोटालेबाज़ कर्मचारियों, बल्कि ठेका कंपनियों की जवाबदेही भी तय करें।
विशेष सचिव आबकारी ने जारी किया निलंबन आदेश
जांच में राजेंद्र नाथ तिवारी के विरुद्ध गंभीर श्रेणी की अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद विशेष सचिव आबकारी विभाग ने उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया। यह कार्रवाई सरकार की छवि पर लगे दाग को साफ करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
BIS कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?
इस पूरे प्रकरण में ठेका संचालन करने वाली BIS कंपनी की भूमिका सबसे संदिग्ध है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अब तक BIS के खिलाफ कोई सीधी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है। इससे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कंपनी के 4 कर्मचारी फरार, FIR के बावजूद गिरफ्तारी नहीं
BIS कंपनी का सुपरवाइज़र और तीन सेल्समैन इस मामले में मुख्य आरोपी हैं, जो घटनास्थल से फरार हो गए।
इन फरार कर्मचारियों के खिलाफ एक FIR आबकारी विभाग में और दो FIR टिकरापारा थाना में दर्ज हैं।
बावजूद इसके, अब तक इनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई, जिससे विभाग की कार्यशैली पर जनता और मीडिया का भरोसा डगमगाने लगा है।
संविधान हत्या दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हुए शामिल, लोकतंत्र को जीवित रखने एवं सशक्त करने के लिए जन-जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अनिवार्य
जवाबदेही तय होगी या फिर से दब जाएगा मामला?
लालपुर प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी नियंत्रण में संचालित शराब दुकानों में भी मिलावट, नकली स्टॉक और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं?
सरकार और विभाग पर अब यह जिम्मेदारी है कि वो न सिर्फ घोटालेबाज़ कर्मचारियों, बल्कि ठेका कंपनियों की जवाबदेही भी तय करें।



