सूद खोरों की करतूतों से त्रस्त जनता कहा सुदखोर जगह छोड़ आवाज से गूंजा
December 11, 2025सूर्या सिंह ब्यूरो मुंगेली – इन दिनों नगर की जनता का सूदखोरो की करतूतों से परेशान होकर नया कहावत शुरू कर दिया है नगर की फिजा मे इन दिनों उची रसूख और राजनीती पहुंच वाले लोगो के लिए सुदखोर जगह छोड़ का नारा बुलंद होने लगा है,,
ऊँचे ब्याज दर पर रकम देने वाले सूदखोरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कहीं राजनीतिक रसूख का हवाला तो कहीं ऊँची पहुँच का संरक्षण—इन सबके सहारे ऐसे लोग बेखौफ़ होकर अपने अवैध कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। बिना किसी व्यवहारी लाइसेंस के यह लोग 5 से 10 प्रतिशत तक की ऊँची दर पर ज़रूरतमंद लोगों को रकम मुहैया कराते हैं और बदले में उन्हें कर्ज़ के जाल में उलझा देते हैं।
आर्थिक संकट से जूझ रहे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार इन सूदखोरों का आसान निशाना बनते हैं। तत्काल पैसे की आवश्यकता में वे इनसे कर्ज़ लेते तो हैं, लेकिन थोड़े ही समय में ब्याज की भारी रकम चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं। कई मामलों में उधार देने वाले दबाव, धमकी और मानसिक उत्पीड़न का सहारा लेकर कर्जदारों से रकम वसूलते देखे गए हैं। कुछ पीड़ितों ने तो यहाँ तक बताया कि राजनीतिक संरक्षण के कारण इनके विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाना भी कठिन हो जाता है।
सूदखोरी का धंधा कानूनी रूप से प्रतिबंधित होने के बावजूद प्रशासन की ढीली निगरानी और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर असुरक्षा की भावना ने इन्हें और अधिक साहसिक बना दिया है। क़ानून विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लाइसेंस के पैसा उधार देना आपराधिक कृत्य है और इस पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन ऐसे अवैध मनी लेंडर्स के खिलाफ विशेष अभियान चलाए, पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और क़ानूनी सहायता उपलब्ध कराए। सामाजिक संगठनों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर ही उन्हें सूदखोरी के चंगुल से बचाया जा सकता है।
सूदखोरी की बढ़ती घटनाएँ न केवल सामाजिक असंतोष को जन्म दे रही हैं, बल्कि कानून और व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। ऐसे में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी है कि वे अवैध उधारी के इस फैलते जाल को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएँ।



