RI प्रमोशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई: EOW ने 10 अफसर-कर्मचारियों पर FIR, दो गिरफ्तार
December 4, 2025
रायपुर। पटवारी से राजस्व निरीक्षक (आरआई) प्रमोशन परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है, जिनमें से दो को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। जांच में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पटवारी संघ और शासन के पत्र पर EOW की बड़ी कार्रवाई
आरआई प्रमोशन परीक्षा घोटाले में पटवारी संघ द्वारा उठाए गए सवालों और शासन स्तर पर हुई शिकायतों के बाद EOW ने गंभीरता से जांच शुरू की। जांच के बाद पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए एजेंसी ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया। इनमें से दो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि बाकी 8 आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।EOW का कहना है कि इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की भूमिका पाई गई है, जिनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सात जिलों में 19 स्थानों पर छापे, मिले तकनीकी व दस्तावेजी सबूत
आपको बता दें कि 19 नवंबर को EOW की टीम ने सात जिलों के 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और तकनीकी सबूत बरामद किए। एजेंसी के अनुसार—
प्रमोशन परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक हुआ था।
कई अभ्यर्थियों को समान अंक मिले।
रिश्तेदारों को एक ही केंद्र और क्रमवार सीटिंग दी गई।
फेल अभ्यर्थियों को बाद में पास दिखाया गया।
ये सभी तथ्य परीक्षा में संगठित स्तर पर गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं।
घोटाले की परतें: कैसे की गई गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट के अनुसार परीक्षा में गड़बड़ी इस तरह हुई—
दो बार जारी पाठ्यक्रम में भुइयां सॉफ्टवेयर का उल्लेख नहीं था, फिर भी इससे जुड़े 7 प्रश्न शामिल किए गए।
OMR शीट पर कोई पहचान चिह्न लिखने की मनाही थी, लेकिन कई शीट पर मोबाइल नंबर लिखे मिले।
एक अभ्यर्थी (रोल 240921) को चयन सूची में शामिल कर बाद में हटाया गया।
एक अन्य (रोल 241921) का नाम मैनुअल एंट्री से चयन सूची में जोड़ दिया गया।
कई जगह भाई, पति-पत्नी और रिश्तेदारों को एक साथ बैठाकर परीक्षा दिलाई गई।
कुछ केंद्रों पर तो जीजा-दीदी-साली तक एक ही कक्ष में बैठे मिले।
प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक पहुँचाया गया और उससे पहले से तैयारी करवाई गई।
क्या है पूरा मामला
दरअसल पटवारी से आरआई प्रमोशन की लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को हुई, जिसमें 2600 से अधिक पटवारी शामिल हुए।
29 फरवरी 2024 को घोषित परिणाम में 216 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण हेतु चयनित किया गया।
बाद में केवल 13 का अंतिम चयन हुआ, लेकिन इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद विवाद गहरा गया।
इसी पूरे मामले में अब EOW ने आपराधिक जांच शुरू कर दी है।
इन 10 लोगों पर दर्ज हुई FIR
जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नामजद FIR हुई—
प्रेमलता पद्माकर (तत्कालीन आयुक्त, सांख्यिकी)
हरमन टोप्पो (सहायक आयुक्त)
वीरेंद्र जाटव (सहायक अधिकारी) – गिरफ्तार
आशीष प्रकाश ब्रजपाल (क्लर्क)
रामाज्ञा यादव (मानचित्रकार)
लीला देवांगन (आरआई)
ईश्वर लाल ठाकुर (बाबू)
हेमंत कौशिक – गिरफ्तार
जयंत यादव
राकेश डड़सेना (प्यून)
EOW के अनुसार आगे की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद घोटाले का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
पटवारी संघ और शासन के पत्र पर EOW की बड़ी कार्रवाई
आरआई प्रमोशन परीक्षा घोटाले में पटवारी संघ द्वारा उठाए गए सवालों और शासन स्तर पर हुई शिकायतों के बाद EOW ने गंभीरता से जांच शुरू की। जांच के बाद पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए एजेंसी ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया। इनमें से दो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि बाकी 8 आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।EOW का कहना है कि इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की भूमिका पाई गई है, जिनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सात जिलों में 19 स्थानों पर छापे, मिले तकनीकी व दस्तावेजी सबूत
आपको बता दें कि 19 नवंबर को EOW की टीम ने सात जिलों के 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और तकनीकी सबूत बरामद किए। एजेंसी के अनुसार—
प्रमोशन परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक हुआ था।
कई अभ्यर्थियों को समान अंक मिले।
रिश्तेदारों को एक ही केंद्र और क्रमवार सीटिंग दी गई।
फेल अभ्यर्थियों को बाद में पास दिखाया गया।
ये सभी तथ्य परीक्षा में संगठित स्तर पर गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं।
घोटाले की परतें: कैसे की गई गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट के अनुसार परीक्षा में गड़बड़ी इस तरह हुई—
दो बार जारी पाठ्यक्रम में भुइयां सॉफ्टवेयर का उल्लेख नहीं था, फिर भी इससे जुड़े 7 प्रश्न शामिल किए गए।
OMR शीट पर कोई पहचान चिह्न लिखने की मनाही थी, लेकिन कई शीट पर मोबाइल नंबर लिखे मिले।
एक अभ्यर्थी (रोल 240921) को चयन सूची में शामिल कर बाद में हटाया गया।
एक अन्य (रोल 241921) का नाम मैनुअल एंट्री से चयन सूची में जोड़ दिया गया।
कई जगह भाई, पति-पत्नी और रिश्तेदारों को एक साथ बैठाकर परीक्षा दिलाई गई।
कुछ केंद्रों पर तो जीजा-दीदी-साली तक एक ही कक्ष में बैठे मिले।
प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक पहुँचाया गया और उससे पहले से तैयारी करवाई गई।
क्या है पूरा मामला
दरअसल पटवारी से आरआई प्रमोशन की लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को हुई, जिसमें 2600 से अधिक पटवारी शामिल हुए।
29 फरवरी 2024 को घोषित परिणाम में 216 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण हेतु चयनित किया गया।
बाद में केवल 13 का अंतिम चयन हुआ, लेकिन इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद विवाद गहरा गया।
इसी पूरे मामले में अब EOW ने आपराधिक जांच शुरू कर दी है।
इन 10 लोगों पर दर्ज हुई FIR
जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नामजद FIR हुई—
प्रेमलता पद्माकर (तत्कालीन आयुक्त, सांख्यिकी)
हरमन टोप्पो (सहायक आयुक्त)
वीरेंद्र जाटव (सहायक अधिकारी) – गिरफ्तार
आशीष प्रकाश ब्रजपाल (क्लर्क)
रामाज्ञा यादव (मानचित्रकार)
लीला देवांगन (आरआई)
ईश्वर लाल ठाकुर (बाबू)
हेमंत कौशिक – गिरफ्तार
जयंत यादव
राकेश डड़सेना (प्यून)
EOW के अनुसार आगे की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद घोटाले का दायरा और बढ़ने की संभावना है।



