शिक्षा विभाग में नियुक्ति घोटाला: अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर घोटाले का खुलासा, एक ही व्यक्ति को दो-दो बार दे दी गयी नियुक्ति

शिक्षा विभाग में नियुक्ति घोटाला: अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर घोटाले का खुलासा, एक ही व्यक्ति को दो-दो बार दे दी गयी नियुक्ति

December 4, 2025 0 By Ajeet Yadav
शिक्षा विभाग में चौंकाने वाला घोटाला उजागर हुआ है। आरटीआई दस्तावेजों से पता चला है कि संतोष राठौर नाम के एक व्यक्ति को दो अलग-अलग पदों पर दो बार अनुकंपा नियुक्ति दी गई, जबकि नियमों के अनुसार एक व्यक्ति को सिर्फ एक ही बार नियुक्ति मिल सकती है। मामला जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंच चुका है और जांच की तैयारी है।

आरटीआई में खुलासा—एक व्यक्ति को दो बार अनुकंपा नियुक्ति

सक्ती जिले के शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों ने विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।आरटीआई में पता चला है कि संतोष राठौर नाम के एक व्यक्ति को शिक्षा विभाग ने दो बार अनुकंपा नियुक्ति दी—वह भी अलग-अलग पदों पर।पहली नियुक्ति सितंबर 2015 में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (भृत्य) के रूप में दी गई थी।

दस्तावेजों के अनुसार संतोष राठौर ने इस पद पर बाकायदा ज्वाइन भी किया।लेकिन महज तीन महीने बाद, यानी दिसंबर 2015 में, उसी व्यक्ति को दोबारा अनुकंपा नियुक्ति जारी कर दी गई। इस बार पद था—सहायक ग्रेड-03।
यानी एक ही व्यक्ति…

सामुदायिक कार्यक्रम प्रबंधन
दो नियुक्तियां

दो पद

और दो बार अनुकंपा का लाभ

यह खुलासा विभाग में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने की ओर संकेत करता है।

नियम साफ: अनुकंपा नियुक्ति एक ही बार
शासन के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति एक संवेदनशील और विशेष परिस्थिति में दी जाने वाली नियुक्ति है, जिसे सिर्फ एक बार ही मंजूर किया जा सकता है।
लेकिन इस मामले में शिक्षा विभाग ने न सिर्फ नियमों की अनदेखी की, बल्कि तीन महीनों के भीतर दोबारा उच्च पद पर नियुक्ति जारी कर दी।

इस बात ने विभागीय आचरण और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर यह प्रक्रिया किसके निर्देश पर और किस आधार पर पूरी की गई।

जिला शिक्षा अधिकारी के पास पहुंची शिकायत
आरटीआई से मिले दस्तावेजों के आधार पर अब शिकायत सीधे जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सक्ती के पास पहुंच गई है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि—

किन अधिकारियों ने इस अवैध प्रक्रिया को मंजूरी दी?

फाइल कैसे पास हुई?

दोहरी नियुक्ति को कौन छुपा रहा था?

क्या यह जानबूझकर किया गया भ्रष्टाचार है?

इस मामले ने शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

डीईओ का बयान – जांच होगी, कार्रवाई तय
जिला शिक्षा अधिकारी कुमुदिनी बाघ द्विवेदी ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें मिल चुकी है और दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि—

“मामला गंभीर है। जांच की जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

उनका बयान साफ करता है कि विभाग इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा, लेकिन यह भी देखने वाली बात होगी कि जांच कितनी पारदर्शी रहती है और क्या वास्तविक कार्रवाई होती है।

भ्रष्टाचार या लापरवाही—कई सवाल अनुत्तरित
अनुकंपा नियुक्ति जैसे संवेदनशील मामले में इस तरह का दोहरा फायदा देना न सिर्फ भ्रष्टाचार या अनियमितता की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विभाग के अंदर फाइलों को कैसे हेरफेर किया जा सकता है।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—क्या इस मामले में सख्त कार्रवाई होगी?या फिर यह भी कई अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबा दिया जाएगा?