एकादश स्कंध भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी के मुख स्वरूप है-आचार्य श्री

एकादश स्कंध भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी के मुख स्वरूप है-आचार्य श्री

November 18, 2025 0 By Ajeet Yadav
(बिर्रा में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा समापन)

जितेन्द्र तिवारी जांजगीर चांपा

बिर्रा-भगवान श्री कृष्ण साक्षात पूर्ण ब्रह्म परमेश्वर है जिनकी 64 कलाएं हैं । धरती से पाप का भार उतारने और सनातन धर्म की रक्षा करने उन्होंने 28 वें द्वापर युग में संपूर्ण ऐश्वर्य के साथ अवतार लिया था। 125 वर्ष धरती में रहने के बाद उन्होंने अपनी लीलाएं समेट कर स्वधामगमन किया था। उक्त बातें दाऊ मुहल्ला बिर्रा में कर्ष परिवार द्वारा स्व विष्णु कर्ष और स्व विक्रम कर्ष के मोक्ष कामना निमित्त प्रसिद्ध भागवताचार्य कथावाचक आचार्य पं राजेन्द्र महराज जी ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाते हुए कहा। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण के एकादश स्कंध जो भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी का मुख स्वरूप है कहते हुए विस्तार से वर्णन किया प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने यह उद्गार प्रकट किया। आचार्य द्वारा सुदामा चरित्र की कथा का सरस वर्णन करते हुए बताया गया कि श्री कृष्ण साक्षात् भगवान होते हुए भी सुदामा जी के चरण धोए और उनका हृदय से सम्मान किया।ऐसा कर उन्होंने संपूर्ण जगत को संदेश दिया कि मेरे परम सखा सुदामा जी का मुझ पर बाल्य काल से ही बड़ा उपकार है। सुदामा जी ने उसे श्रापित चने को अकेले खाकर मुझे दरिद्र होने से बचाया है। ब्राह्मण के चरण मेरे भवन पर पड़े और मेरा भाग्य धन्य हो गया।आचार्य द्वारा द्वादश स्कंध में वर्णित कलयुग के दोष से बचने का भी उपाय बताया गया। उन्होंने कहा कि भगवान नाम संकीर्तन ही कलयुग के सभी दोषों को पाप और ताप को नाश करने वाला है ।परीक्षित मोक्ष की कथा श्रवण कराने आचार्य ने सभी श्रोताओं को कहा कि हम ऐसे यज्ञों के माध्यम से सनातन और अपने धर्म की निष्ठा पूर्वक रक्षा और पालन करते रहे।कथा श्रवण करने विशेष रूप से आए जांजगीर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत जांजगीर चंपा के उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया, जिला पंचायत के सभापति मोहन कुमारी साहू, जनपद सदस्य रितेश रमण सिंह राजमहल बिर्रा, सरपंच श्रीमती पिलीबाई साहू प्रतिनिधि एकादशिया साहू,चित्रभानू पांडेय, थानाप्रभारी जयकुमार साहू तथा गणमान्य नागरिक और श्रोताओं को आचार्य ने विशेष आग्रह के साथ कहा की वर्तमान परिदृश्य में हम सभी देशवासियों को सचेत रहने की आवश्यकता है क्योंकि बाहरी शक्तियों के द्वारा हमारे देश में । आतंक और भय पैदा किया जा रहा है। दिल्ली में हुए बम कांड से सारा देश दहल चुका है।डॉक्टरों की सेवा भाव को देखते हुए हम उन्हें भगवान भी कहते हैं किंतु अगर कोई डॉक्टर ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश में आतंक फैला रहा है और देश के 32 अलग-अलग स्थान को टारगेट कर भारत को चुनौती दे रहे हैं तो निश्चित ही यह पूरे भारतवासियों के लिए एक सबक है।आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने यह भी कहा कि सनातन की दृष्टि से वेद पुराणों की कथाएं आगे भी होनी चाहिए किंतु अब पूरे देश में नागरिकों को जगाने के लिए राष्ट्र यज्ञ एवं भारत माता पूजन महोत्सव करने की भी नितांत आवश्यकता है । ऐसा आयोजन कर देशवासियों को अपने देश के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भाव जगाया जा सकता है ।इसी राष्ट्रीय प्रेरणा की दृष्टि से भागवत प्रवाह की योजना से सभी भागवत कथाओं में भारत माता की पूजा एवं आरती को अनिवार्य कर दिया गया है।वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ महतारी की भी आरती प्रतिदिन की जाती है । कथाओं का उद्देश्य जन जागरण एवं सामाजिक समरसता के साथ राष्ट्र के प्रति सेवाभाव जागृत करना मुख्य है।प्रतिदिन क्षेत्र वासियों को श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के साथ जीवंत झांकियां एवं संकीर्तन का लाभ प्राप्त हुआ । इस यज्ञ के आयोजनकर्ता सपरिवार श्रीमती छतबाई अनंदराम कर्ष एवं श्रीमती रजनी देवी राजकमल कर्ष ।द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।तुलसी वर्षा,यज्ञ, हवन, पूर्णाहुति और सहस्त्रधारा के साथ संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा समापन हुआ ।