बिर्रा- हनुमान चौक सड़कपारा सिलादेही में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का सप्तम दिवस सुदामा चरित्र की गहन भक्ति और भावुक प्रसंगों के साथ संपन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर कथा व्यास पूज्या गीतांजलि शर्मा जी ने सुदामा चरित्र का हृदयस्पर्शी वर्णन प्रस्तुत किया। कथा के दौरान अरे द्वारपालों कन्हैया से…….कह दो भजन शुरू हुआ तो पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता का ऐसा चित्रण किया गया कि श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्तिरस में डूब गए।पूज्या श्रीमती शर्मा जी ने बताया कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता केवल सांसारिक संबंध नहीं, बल्कि आत्मिक प्रेम और विश्वास का प्रतीक थी। निर्धन होते हुए भी सुदामा ने कभी लोभ से प्रभु से कुछ नहीं मांगा, बल्कि सच्ची भक्ति और विनम्रता से पूर्ण होकर द्वारिका पहुंचे। श्रीकृष्ण द्वारा अपने मित्र का चरण धोना, उन्हें गले लगाना और उनके सम्मान को सर्वोपरि रखना—यह सब प्रसंग सुनाकर उन्होंने दया, करुणा और प्रेम का अनूठा संदेश दिया।
कथा स्थल पर उपस्थित रामाधार केेंवट,रामशरण केेंवट,रामेश्वर साहू,विनोद पटेल,लीलाधर साहू, बालकिशन पटेल,भूपेंद्र साहू,ओमशरण साहू,दुकालू साहू,सोमू पटेल,राजेंद्र पटेल,मनोज पटेल,अनिल आदित्य,चंदराम साहू,भोला राम साहू, शुभम थवाईत, हीरालाल कटकवार सहित महिलाएं बड़ी संख्या श्रद्धालुगण उपस्थित हुये।