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क्या आपको भी अक्सर पेट में जलन, खाना खाने के बाद भारीपन या बार-बार अपच की समस्या रहती है? अगर हां, तो इसे सिर्फ गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार शरीर गंभीर बीमारियों के संकेत बहुत सामान्य लक्षणों के जरिए देता है, लेकिन लोग उन्हें रोजमर्रा की परेशानी मानकर टालते रहते हैं।
पैंक्रियाटिक कैंसर यानी अग्न्याशय का कैंसर भी ऐसी ही खतरनाक बीमारी है, जिसके शुरुआती संकेत पेट दर्द, हार्टबर्न और पाचन संबंधी समस्याओं जैसे हो सकते हैं। समय रहते इन लक्षणों की पहचान और जांच न केवल बीमारी का जल्दी पता लगाने में मदद कर सकती है, बल्कि इलाज की संभावनाओं को भी बेहतर बना सकती है।
एक हालिया मामले में महिला ऐसे ही पेट में लंबे समय से बने रहने वाली दिक्कतों को खान-पान में गड़बड़ी की समस्या मानकर इग्नोर करती रही। उसे लगता था कि ये अपच-गैस की समस्या है, पर इस तरफ कभी ध्यान ही नहीं गया कि जिसे वह पेट दर्द और अपच मान रही थी, असल में वह पैंक्रियाटिक कैंसर का संकेत था। आखिरकार इस जानलेवा बीमारी ने उसकी जान ले ली।

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पैंक्रियाटिक कैंसर से मौत का मामला
– फोटो : Adobe stock
पैंक्रियाटिक कैंसर ने ले ली जान
यूके की स्थानीय मीडिया की एक रिपोर्ट में लूसी ड्राइवर नाम की महिला का जिक्र मिलता है जो लंबे समय से अपच की समस्या का शिकार थीं। उन्हें पहले ब्रेस्ट कैंसर रह चुका था, इसके बाद से ये दिक्कत लगातार बनी रहती थी।
- 2005 में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने पर, उनकी बाईं ब्रेस्ट को हटाने के लिए सर्जरी हुई। जिसके बाद कीमोथेरेपी के कई राउंड चले और एक साल के अंदर ही वे ठीक हो गईं।
- हालांकि मई 2022 से उन्हें अक्सर पेट में दर्द शुरू हो गया।
- उन्होंने इसे पैंक्रियाटाइटिस (पैंक्रियास में सूजन आने की समस्या) मान लिया।
- लेकिन ये लक्षण पैंक्रियाटिक कैंसर के थे। जिससे 57 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रिटिश महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद दूसरे कैंसर होने का खतरा काफी ज्यादा देखा जाता रहा है। आमतौर पर एक बार कैंसर से ठीक होने के बाद लोग मान लेते हैं कि अब उन्हें खतरा नहीं है, इसलिए दूसरे लक्षणों पर अक्सर ध्यान ही नहीं देते।

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पेट में दर्द और अपच को न करें अनदेखा
– फोटो : Freepik.com
शुरू में क्या दिक्कतें होती थीं?
लूसी ड्राइवर के पति जेसन वेंकटसामी बताते हैं कि उनकी पत्नी को ब्रेस्ट कैंसर से पूरी तरह ठीक होने के बाद भी हमेशा अपच की समस्या बनी रहती थी। उन्हें पेट के ऊपरी हिस्से या सीने में जलन बनी रहती थी। अब जब भी मैं इस बारे में सोचता हूं, तो अफसोस होता है कि काश पेट की इन दिक्कतों को हल्के में न लिया होता और समय रहते जांच करा ली होती तो शायद आज वो जिंदा होती।
- पत्नी लूसी में बीमारी का पता चलने से पहले के दिनों में वह मसालेदार खाना बिल्कुल पचा नहीं पाती थीं।
- जब ये दिक्कत काफी समय तक बनी रही तो फिर खून की जांच कराई गई। जांच के नतीजे इतने चिंताजनक थे कि उन्हें तुरंत आपातकालीन विभाग में जाने के लिए कहा गया।
- वेंकटसामी कहते हैं, मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह कैंसर होगा। यह मेरे दिमाग में भी नहीं आया। हमने तो बस यही सोचा था कि यह पैंक्रियाटाइटिस या ऐसी कोई दिक्कत होगी जिसका आसानी से इलाज हो सकता है।
- ठीक अगली सुबह, लूसो को पैंक्रियाटिक कैंसर स्टेज-2 का शिकार पाया गया।

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पैंक्रियाटिक कैंसर की समस्या को जानिए
– फोटो : Adobe stock Images
पैंक्रियाटिक कैंसर और इसके खतरे
पैंक्रियाटिक कैंसर दुनियाभर में 12वां सबसे आम कैंसर है। इसके हर साल 5.10 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं और करीब 4.67 लाख लोगों की मौत हो जाती है। देर से पता चलने और इसके आक्रामक स्वभाव के कारण, यह दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का छठा सबसे बड़ा कारण है।
- पैंक्रियाटिक कैंसर, पैंक्रियास (अग्नाशय) की कोशिकाओं में बढ़ना शुरू होता है। पैंक्रियास पेट के निचले हिस्से के पीछे स्थित होता है।
- यह अंग ऐसे एंजाइम बनाता है जो भोजन पचाने में मदद करते हैं, और ऐसे हार्मोन बनाता है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

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पेट की समस्याओं को बिल्कुल न करें इग्नोर
– फोटो : Freepik.com
पैंक्रियाटिक कैंसर की शुरुआत में ही कैसे पहचान करें?
इस कैंसर को लेकर सबसे बड़ी चिंता ये रही है कि पैंक्रियाटिक कैंसर का पता शुरुआती चरणों बहुत कम ही चल पाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अक्सर इसके लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते जब तक कि यह शरीर के दूसरे अंगों में फैल न जाए। पैंक्रियाटिक कैंसर शुरुआत में आमतौर पर ऐसे संकेत देता है जो पेट की अन्य दिक्कतों से मिलती-जुलती हैं। इस वजह से लोगों का इसपर ध्यान नहीं जाता है।
पैंक्रियाटिक कैंसर के इन संकेतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
- पेट में दर्द जो किनारों या पीठ तक फैलता हो।
- भूख न लगना और वजन कम होना।
- बार-बार पीलिया होते रहना।
- मल का रंग हल्का होना और गहरे रंग का पेशाब।
- शरीर में अक्सर खुजली होते रहना।
- हाथ या पैर में दर्द और सूजन, जो खून के थक्के के कारण हो सकती है।
अगर आपको ऐसे लक्षण दिखाई दें और सामान्य उपायों-दवाओं से भी न ठीक हो रहे हो तो तुरंत किसी डॉक्टर से मिल लें। समय पर कैंसर का पता चल जाने से इलाज के सफल होने और जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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स्रोत:
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।




