एफ.एम.डी. मुक्त भारत के अंतर्गत टीकाकरण अभियान प्रारंभ 370 अमले द्वारा किया जाएगा टीकाकरण कार्य
September 18, 2025
चंद्रभान यादव जशपुर। राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत एफ एम डी मुक्त भारत अभियान के तहत चरण-6 एफ.एम.डी. टीकाकरण कार्यक्रम पूरे प्रदेश में 15 सितम्बर 2025 से प्रारंभ किया गया है। इस अभियान में जिलें के कुल लक्षित 3,80,758 गोवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है।
पशुधन विकास जशपुर द्वारा 58 दल का गठन किया गया है जिसमें पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ , सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, परिचारक, गौसेवक, पी. आई.डब्ल्यू, मैत्री, पशु सखी कुल 370 अमले द्वारा टीकाकरण कार्य संपन्न किया जावेगा।
मुंहपका खुरपका रोग दो खुरों वाले पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेंड़, बकरी, हिरन, सुअर तथा अन्य जंगली पशुओं में होने वाला एक अत्यंत संक्रामक एवं घातक विषाणु जनित रोग है। गायों और भैंसों को खुरपका रोग काफी प्रभावित करता है। यह काफी तेजी से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। इसे प्रभावित होने वाले जानवर में अत्याधिक तेज बुखार के साथ मुँह और खुरों पर छाले और घाव बन जाते है। रोग के असर के कारण कुछ जानवर स्थायी रूप से लंगड़ें भी हो सकते है। जिस कारण वे खेती में इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाते। इसका संक्रमण होने के कारण गायों का गर्भपात हो सकता है, दुध उत्पादन कम हो जाता है। इसका बचाव ही इसका उपचार है।
डॉ. एम.एस.बघेल, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं जिला जशपुर ने जानकारी दी कि टीकाकरण ही इस बीमारी से बचाव के लिए सर्वोत्तम उपाय है। उन्होंने सभी पशु पालकों से अपील करने हुए आग्रह किया है कि अपने पशुओं को एफ.एम.डी. टीका लगवाने अवश्य लगवाए।
पशुधन विकास जशपुर द्वारा 58 दल का गठन किया गया है जिसमें पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ , सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, परिचारक, गौसेवक, पी. आई.डब्ल्यू, मैत्री, पशु सखी कुल 370 अमले द्वारा टीकाकरण कार्य संपन्न किया जावेगा।
मुंहपका खुरपका रोग दो खुरों वाले पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेंड़, बकरी, हिरन, सुअर तथा अन्य जंगली पशुओं में होने वाला एक अत्यंत संक्रामक एवं घातक विषाणु जनित रोग है। गायों और भैंसों को खुरपका रोग काफी प्रभावित करता है। यह काफी तेजी से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। इसे प्रभावित होने वाले जानवर में अत्याधिक तेज बुखार के साथ मुँह और खुरों पर छाले और घाव बन जाते है। रोग के असर के कारण कुछ जानवर स्थायी रूप से लंगड़ें भी हो सकते है। जिस कारण वे खेती में इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाते। इसका संक्रमण होने के कारण गायों का गर्भपात हो सकता है, दुध उत्पादन कम हो जाता है। इसका बचाव ही इसका उपचार है।
डॉ. एम.एस.बघेल, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं जिला जशपुर ने जानकारी दी कि टीकाकरण ही इस बीमारी से बचाव के लिए सर्वोत्तम उपाय है। उन्होंने सभी पशु पालकों से अपील करने हुए आग्रह किया है कि अपने पशुओं को एफ.एम.डी. टीका लगवाने अवश्य लगवाए।


