आज विद्यालय पहुंचने के उपरान्त सभी कक्ष में जाकर मेरे विद्यार्थियों के द्वारा निर्मित ललित कला के कार्यों को देख रही थी,,,,,उनके मेहनत ,सीखने का नायब जज़्बा,लगन,और खुशी की सौंधी सौंधी महक ने मुझे और उत्साहित कर दिया,,,,,,,उन्होंने केवल चित्र बनाना,रंग डालना ही नहीं सीखा अपितु उन चित्रों में अपने हुनर से कुछ नया करने की सोची। मेरे थोड़े मार्गदर्शन से ही 6वी 7वी 8वी के बच्चे चहक उठते ,,,,कभी कबाड़ से जुगाड तो कभी पेपर ,सीपी ,ऊन,रद्दी कागज़ तो कभी चूड़ी के टुकड़े न जाने क्या क्या ले आते और मुझे कहते मैडम कुछ बनाना है,,,,,,,,मैं हंसती और शुरू हो जाती कुछ नया करने के लिए,,,,,,,
आपका हुनर तभी सफल है जब आप दूसरों को भी हुनरमंद बना दें,,,,,,, विद्यालय के दीवारों पर सजावट देखती हूं तो उस सजावट के पीछे बच्चों के हुनर को नमन करते मुस्कुराने का एक और जरिया मिल जाता है,,,,,,,,, न जाने कितने बच्चे हुनरमंद हो विद्यालय से आगे की कक्षा में चले गए,,,,,,लेकिन उनके द्वारा बनाई हुई कृतियां मुझे एक शिक्षक होने पर गर्व की अनुभूति कराती रहती हैं
जब नए बच्चों में सीखने का हीरक जज्बा देखती हूं तो मेरी कला फिर उनसे मुझे जोड़ती चली जाती हैं,,,,,,,,कभी कभी ऐसा भी लगने लगता है दीवारें बोल उठेंगी।नन्हें हाथों में कितनी खूबसूरती है मैने शिक्षक बनने के बाद करीब से देखा है,,,,,,कला के पीछे मुस्कुराती ,चहकती,उछलती दुनिया का मालिक होना एक शिक्षक ही समझ सकता है,,,,,,,,सदा मेरे बच्चों के हुनर में चार चांद लगे,नाम रौशन करे विद्यालय का,,,,,,,एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ा सम्मान उनके हुनरमंद बच्चे ही हैं,,,,,,,,,सम्मान तो मिलता रहेगा बच्चों की हुनर उन्हें उनके मुकाम तक पहुंचाए ,,,,,मेरे प्यारे बच्चों बस यूं ही आगे बढ़ते रहो मुस्कुराते रहो