मंत्रीजी…..”स्कूल जतन योजना” में 1500 करोड़ के भ्रष्टाचार की जांच में कलेक्टरों ने तो किसी की नहीं सुनी, अब क्या आपकी सुनेंगे !
August 29, 2025
रायपुर । छत्तीसगढ़ के पूर्ववर्ती सरकार में स्कूलों के जीर्णोधार के नाम पर करीब 1500 करोड़ रूपये का भ्रष्टाचार किया गया। “स्कूल जतन योजना” के नाम से कांग्रेस सरकार में हुए इस भ्रष्टाचार की जांच के लिए खुद मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के सख्त निर्देश दिये थे। लेकिन आज 13 महीने बाद भी इस मामले में अधिकांश जिले के कलेक्टरों ने जांच रिपोर्ट पेश नहीं कर सके है। ऐसे में सूबे के नये शिक्षा मंत्री क्या इस 1500 करोड़ रूपये के भ्रष्टाचार की जांच में रोड़ा अटकाने वालों पर एक्शन लेंगे ? या फिर भ्रष्टाचार की जांच में एक बार फिर अफसरशाही हावी रहेगी।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता बदलते ही पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आये। कांग्रेस सरकार में हुए कोयला, शराब और DMF घोटाले में ED, CBI और ACB ने बड़ा एक्शन लेते हुए IAS अफसरों के साथ ही कई बड़े कारोबारियों को अरेस्ट किया। कांग्रेस सरकार में हुए भ्रष्टाचार की फेहरिस्त में एक नाम “स्कूल जतन योजना” का भी आता है। इस योजना के तहत स्कूलों के जीर्णोधार के लिए साल 2022-23 में कांग्रेस सरकार ने 2000 करोड़ रूपये का आबंटन किया था। आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार में अफसरों और राजनेताओं ने मिली भगत कर कागजों में ही स्कूलों का जीर्णोधार कर करीब 1500 करोड़ रूपये का घोटाला किया।
सूबे में सरकार बदलते ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जुलाई 2024 को “स्कूल जतन योजना” के तहत साल हुए कार्यो की जांच के निर्देश जारी किये गये। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर जांच के निर्देश देने के साथ ही 15 दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट लोक शिक्षण संचालनालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन हद है मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव के पत्र लिखने के बाद भी अधिकांश जिलों के कलेक्टरों ने इस भ्रष्टाचार की जांच कराना मुनासिब नही समझा। अब आलम ये है कि आज 13 महीने बाद भी कलेक्टरों की नाफरमानी के कारण 1500 करोड़ रूपये के भ्रष्टाचार की जांच के निर्देश फाइलों में धूल खा रही है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता बदलते ही पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आये। कांग्रेस सरकार में हुए कोयला, शराब और DMF घोटाले में ED, CBI और ACB ने बड़ा एक्शन लेते हुए IAS अफसरों के साथ ही कई बड़े कारोबारियों को अरेस्ट किया। कांग्रेस सरकार में हुए भ्रष्टाचार की फेहरिस्त में एक नाम “स्कूल जतन योजना” का भी आता है। इस योजना के तहत स्कूलों के जीर्णोधार के लिए साल 2022-23 में कांग्रेस सरकार ने 2000 करोड़ रूपये का आबंटन किया था। आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार में अफसरों और राजनेताओं ने मिली भगत कर कागजों में ही स्कूलों का जीर्णोधार कर करीब 1500 करोड़ रूपये का घोटाला किया।
सूबे में सरकार बदलते ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जुलाई 2024 को “स्कूल जतन योजना” के तहत साल हुए कार्यो की जांच के निर्देश जारी किये गये। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर जांच के निर्देश देने के साथ ही 15 दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट लोक शिक्षण संचालनालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन हद है मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव के पत्र लिखने के बाद भी अधिकांश जिलों के कलेक्टरों ने इस भ्रष्टाचार की जांच कराना मुनासिब नही समझा। अब आलम ये है कि आज 13 महीने बाद भी कलेक्टरों की नाफरमानी के कारण 1500 करोड़ रूपये के भ्रष्टाचार की जांच के निर्देश फाइलों में धूल खा रही है।



