डामरीकृत सड़क पर बारिश , गुणवत्ता पर सवाल,
May 22, 2025बीजापुर जिले के मोदकपाल से पुसगुडी तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्मित सड़क पर हाल ही में किए गए डामरीकरण कार्य को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। कारण यह है कि कार्य पूरा होने के महज 24 घंटे बाद ही हुई भारी बारिश ने सड़क की सतह को प्रभावित कर दिया, जिससे ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, संबंधित अधिकारी मानकों का पालन करने का दावा कर रहे हैं।
### **ग्रामीणों का आरोप: “सड़क निर्माण में गड़बड़ी”**
स्थानीय निवासियों का कहना है कि डामरीकरण की परत पतली और अस्थिर है। एक ग्रामीण ने बताया, *”पिछले साल भी इसी सड़क को उखाड़ा गया था, क्योंकि जाँच में खामियाँ मिली थीं। अब फिर बारिश के चलते सड़क उखड़ने लगेगी। यह ठेकेदार और अधिकारियों की लापरवाही है।”*
### **अधिकारियों का पक्ष: “मानकों का पालन”**
अधिकारी (PMGSY) ने दावा किया कि डामरीकरण **2 सेंटीमीटर मोटाई** वाली परत से किया गया है, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, *”इमलसन और बिटुमेन का अनुपात सही रखा गया है
### **पुराना विवाद और नया संकट**
यह सड़क पहले भी विवादों में रही है। **2022 में** उच्च स्तरीय जाँच के बाद सड़क की परत उखाड़नी पड़ी थी, जिससे ठेकेदार को लाखों का नुकसान हुआ। अब नए कार्य के तुरंत बाद बारिश ने एक बार फिर निर्माण प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न कर दिया है।
### **विशेषज्ञों की राय: “समय और तापमान महत्वपूर्ण”**
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डॉ. राजेश्वर राव ने बताया कि डामरीकरण के बाद कम से कम **48-72 घंटे** तक सूखे मौसम की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, *”24 घंटे में बारिश होने से बिटुमेन का बंधन कमजोर हो सकता है। यह सड़क की उम्र घटाता है।”*
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल जाँच और दोषी ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।
आपको बता दें कि
यह मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और निगरानी की कमी को उजागर करता है। बीजापुर जैसे ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढाँचे के टिकाऊपन पर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या केवल कागजी मानक ही पर्याप्त हैं, या जमीनी स्तर पर दायित्वबोध भी जरूरी है?


