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पंजाब निकाय चुनाव में जनादेश के मायने क्या:छोटे चुनाव से भाजपा ने मजबूत की सियासी जमीन, 2027 में होगा ‘खेला’

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पंजाब निकाय चुनाव का परिणाम कई संदेश लेकर आया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनावी ट्रेंड के मुताबिक इस बार भी निकाय चुनाव में पंजाब के सयाने मतदाताओं ने सत्तारूढ़ सरकार को ही जितवाकर विकास की पटरी पर डबल इंजन के साथ आगे बढ़ने का मौका दिया है।

उधर, नतीजों का दूसरा पक्ष यदि देखें तो इन छोटे चुनावों (वार्डों तक सीमित) में जनादेश का बड़ा संदेश भी सामने आया है जो इस बात का संकेत देता है कि इस बार विधानसभा चुनाव के रण में मुकाबला रोचक होगा।

भाजपा ने मजबूत की सियासी जमीन

भले ही चुनाव में सत्तारूढ़ आप को बढ़त मिली है मगर भाजपा ने भी अपनी सियासी जमीन को मजबूत किया है। भाजपा जो कि पंजाब में अपने जनाधार के लिए बरसों से जूझ रही है, उसका प्रदर्शन सधी हुई रणनीति का नतीजा कहा जा सकता है। साल 2021 के निकाय चुनाव में भाजपा 2215 में से 49 सीटों पर सिमट गई थी मगर इस बार निकाय की कुल 1977 सीटों में से भाजपा ने 167 सीटों पर जीत दर्ज की है। 

आठ नगर निगमों से दो पर तो अपना वर्चस्व भी स्थापित किया है। ऐसा तब है जब 1977 सीटों में से भाजपा के प्रत्याशी सिर्फ 1316 सीटों पर ही चुनाव लड़ रहे थे, काफी नामांकन रद्द हो गए थे। भाजपा ने अपने इस प्रदर्शन से यह जता दिया है कि आठ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में उसे हल्के में लेना विरोधियों के लिए नासमझी हो सकती है।

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प्राचार्य रिटायर्ड,पर क्रियाशीलता पूर्ववत जारी”” प्राचार्य सेजेस पटेवा समीर चन्द्र प्रधान ने चलाया ‘मोबाइल मोटिवेशनल क्लास।                                   ‘पटेवा /25.08.2026/ सेजेस पटेवा के सेवानिवृत्त प्राचार्य जो 31. मार्च 2026 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर सेवा‌निवृत हो चुके हैं, वे किसी‌‌ परिचय के मोहताज नहीं हैं। शासकीय उच्चतर माध्यमिक ‌विद्यालय का सर्वांगीण विकास करने‌ के अलावा ‌अपनी‌ कर्मठता‌ और‌ निष्ठा तथा‌‌ रचनाधर्मिता से‌ जिस तरह जिले‌ की शिक्षा जगत में अपनी अलग‌ पहचान बनाई सदा ही विभिन्न ‌अवसरों पर इसकी‌ चर्चा पिछले कई वर्षों ‌से होती‌ रही‌ है।उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पुरुस्कारों तथा‌ सम्मानों से नवाजा ‌भी गया है किन्तु इन दिनों उनका‌‌ नाम‌ इसलिए ‌चर्चा में है कि सेवानिवृत्त होने‌ के तत्काल पश्चात अप्रैल से अपनी नवाचारी प्रवृति के अनुरूप निरंतर क्रियाशील ‌रहने के लिए उन्होंने “मोबाइल मोटिवेशनल क्लास” विभिन्न स्कूलों में लेना प्रारंभ कर दिया है। इसके अंतर्गत ‌वे प्रति सप्ताह अपनी ही‌ कार से कम से‌ कम दो‌ तीन विद्यालय में जा‌ विद्यार्थियों और‌ शिक्षकों को मोटीवेशनल ब्याख्यान देते‌ हैं तथा संक्षिप्त वर्कशॉप भी लगाते ‌हैं।श्री प्रधान ‌कैरियर गाइडेंस के स्थान पर कैरियर का‌ लक्ष्य‌ बनाने से पूर्व विद्यार्थियों को उसके लिए अपने व्यक्तित्व की पहचान करने पर बल देते‌ हैं‌ और उन्हें स्वयं से चर्चा करना, स्वयं ‌के‌ प्रति ईमानदार होकर स्वयं की‌ ,क्षमताओं, अक्षमताओं,लाभ‌ पहूंचाने‌ वाले अवसरों ‌, एवं बाधाओं को ढूंढ निकालने तथा खुद के‌ व्यक्तित्व का वास्तविक स्वरुप का‌ पता लगाने के लिए ‌अनेक आकर्षक प्रविधियों का उपयोग करते हैं जो विद्यार्थियों और शिक्षकों को बेहद आकर्षित ‌करता‌ है।श्री ‌प्रधान 62 वर्ष ‌के जरुर‌ है किन्तु उनका‌ शारीरिक और‌‌ मानसिक क्रिया शीलता बरबस ही विद्यार्थियों को‌ आकर्षित करती है।आज झलप‌ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक ‌विद्यालय में 125 छात्र ‌छात्राओं लगातार 2 घंटे जिस तरह प्रेरक व्याख्यान से बांधे रखा, उपस्थित प्राचार्य श्रीमती ‌विजय लक्ष्मी सिदार तथा शाला विकास समिति ‌अध्यक्ष श्री निर्भय नायक ने इसकी जम कर‌ तारीफ‌ की‌ तथा‌‌ श्री प्रधान ‌सर‌ से पुन: समय‌ समय पर‌ विद्यालय आकर विद्यार्थियों तथा‌ शिक्षकों को प्रेरित करने का निवेदन किया। व्याख्यान ‌के दौरान पूरी तरह‌ ध्यान करने वाले समस्त विद्यार्थियों ने व्याख्यान को अत्यधिक उपयोगी बताया।श्री प्रधान ने चर्चा के दौरान ‌बताया कि अभी तक‌ वे लगभग ‌15 विद्यालयों में अपना मोटिवेशनल ‌ब्याख्यान दे चुके हैं तथा‌ उनके‌ पास‌ विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों का निमंत्रण निरंतर आ रहा है। अभी तक वे प्रमुख रुप से हाई/हायर सेकेण्डरी स्कूल बनपचरी,बावनकेरा,खट्टा,सुखरी डबरी,राम तुम,तुम गांव,अमलोरी, खमरिया,,डी एम एस महासमुन्द,,छुआलीपतेरा,का‌भ्रमण कर व्याख्यान दे‌ चुके हैं ।तथा हाई/हायर सेकंडरी स्कूल कन्या पिथौरा, गोपाल पुर,सुखीपाली,देवरी,से आमंत्रण आ चुके हैं।श्री प्रधान कहते हैं रिटायरमेंट शब्द शासन द्वारा निर्मित है ,मेरे द्वारा ‌नहीं। मैं दूसरी पारी खेल रहा हूं, जिसमें मुझे पहले की तरह ही आनंद आ रहा‌है। मोबाइल मोटिवेशनल क्लास के लिए श्री‌ प्रधान दूरस्थ और‌ साधन विहीन विद्यालय को अधिक प्राथमिकता देते हैं।समीर चन्द्र प्रधान की‌ ऊर्जा और क्रियाशील ता को‌ देख कर यह प्रश्न जरुर‌ उठता है पुनर्नियुक्ति सेवानिवृत्ति के पश्चात सत्रांत तक ही होना कितना औचित्य पूर्ण‌ है।शासन को इस नियम पर पुनर्विचार ‌करना चाहिए कि‌ यदि शिक्षा विभाग कोई कर्मचारी/अधिकारी शारीरिक और‌ मानसिक‌ रूप‌ पुर्णत: स्वस्थ‌ है तो क्यों ‌न उसकी‌ क्षमता‌ ,और‌अनुभव का‌लाभ लिया जाय।

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