जानकारी छुपाएंगे तो खायेंगे जेल की हवा, पोक्सो पर एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन
February 27, 2026
जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मैट्स विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act)” विषय पर हितधारकों के लिए एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन मैट्स यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम, पंडरी, रायपुर में किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण हेतु प्रावधानित कानूनों, विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन, बाल हितैषी न्याय प्रक्रिया तथा संबंधित विभागों के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन श्री यशपाल जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया गया।
कार्यशाला में परिक्षेत्र पर्यवेक्षकों, पुलिस विभाग के अधिकारियों, जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग के अमलो तथा मैट्स विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। विषय विशेषज्ञ श्री विपिन ठाकुर, राज्य समन्वयक एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़, द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत पीड़ित की पहचान करना उन्हें बाल कल्याण समिति के माध्यम से सहायता प्रदान करना लैंगिक अपराधों से पीड़ित बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्रकरण को दर्ज करने की अनिवार्यता एवं अनिवार्य रिपोर्टिंग और झूठी रिपोर्टिंग के तहत सजा के प्रावधानों व पुलिस के द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई। प्रोफेसर दीनानाथ यादव मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा पॉक्सो अधिनियम के तहत समाज की भूमिका एवं उनके दायित्व के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष तिवारी के द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत पीड़ित क्षतिपूर्ति तथा विधिक सहायता के संबंध में बताया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एक्ट की प्रमुख धाराओं, बाल अधिकारों, शिकायत एवं अन्वेषण प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन, पीड़ित बालकों के पुनर्वास एवं मनोसामाजिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की गई।
वक्ताओं ने बताया कि पॉक्सो अधिनियम, 2012 बालकों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने हेतु एक सशक्त एवं विशेष कानून है, जो त्वरित न्याय और बाल हितैषी प्रक्रिया सुनिश्चित करता है। साथ ही, उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, संदिग्ध मामलों की समय पर सूचना देने तथा पीड़ित बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न जिज्ञासाएँ एवं अनुभव साझा किए गए, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। यह कार्यशाला सुश्री शैल ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के दिशा निर्देश एवं श्री यशपाल, जिला महिला बाल विकास अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के मार्गदर्शन तथा श्रीमती माधुरी शर्मा जिला बाल संरक्षण अधिकारी के नेतृत्व में संजय निराला के समन्वय से आहुत किया गया। अंत में संजय निराला के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।
यह कार्यशाला बाल संरक्षण के क्षेत्र में जागरूकता एवं समन्वित प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण हेतु प्रावधानित कानूनों, विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन, बाल हितैषी न्याय प्रक्रिया तथा संबंधित विभागों के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन श्री यशपाल जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किया गया।
कार्यशाला में परिक्षेत्र पर्यवेक्षकों, पुलिस विभाग के अधिकारियों, जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग के अमलो तथा मैट्स विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। विषय विशेषज्ञ श्री विपिन ठाकुर, राज्य समन्वयक एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़, द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत पीड़ित की पहचान करना उन्हें बाल कल्याण समिति के माध्यम से सहायता प्रदान करना लैंगिक अपराधों से पीड़ित बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्रकरण को दर्ज करने की अनिवार्यता एवं अनिवार्य रिपोर्टिंग और झूठी रिपोर्टिंग के तहत सजा के प्रावधानों व पुलिस के द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई। प्रोफेसर दीनानाथ यादव मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा पॉक्सो अधिनियम के तहत समाज की भूमिका एवं उनके दायित्व के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष तिवारी के द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत पीड़ित क्षतिपूर्ति तथा विधिक सहायता के संबंध में बताया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एक्ट की प्रमुख धाराओं, बाल अधिकारों, शिकायत एवं अन्वेषण प्रक्रिया, साक्ष्य संकलन, पीड़ित बालकों के पुनर्वास एवं मनोसामाजिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की गई।
वक्ताओं ने बताया कि पॉक्सो अधिनियम, 2012 बालकों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने हेतु एक सशक्त एवं विशेष कानून है, जो त्वरित न्याय और बाल हितैषी प्रक्रिया सुनिश्चित करता है। साथ ही, उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि वे अपने-अपने स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, संदिग्ध मामलों की समय पर सूचना देने तथा पीड़ित बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न जिज्ञासाएँ एवं अनुभव साझा किए गए, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। यह कार्यशाला सुश्री शैल ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के दिशा निर्देश एवं श्री यशपाल, जिला महिला बाल विकास अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के मार्गदर्शन तथा श्रीमती माधुरी शर्मा जिला बाल संरक्षण अधिकारी के नेतृत्व में संजय निराला के समन्वय से आहुत किया गया। अंत में संजय निराला के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।
यह कार्यशाला बाल संरक्षण के क्षेत्र में जागरूकता एवं समन्वित प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।



