शासकीय भूमि पर कार्रवाई के दौरान विवाद: तहसीलदार से जनपद सदस्य की झड़प, आदिवासी समाज में उबाल — घेराव व चक्का जाम की चेतावनी
October 31, 2025रिपोर्टर:- प्रभा यादव
जशपुर। सन्ना क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण रोकने गई तहसीलदार रोशनी तिर्की और जनपद सदस्य राकेश गुप्ता के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है।
घटना ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है बल्कि आदिवासी समाज में भी तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, ग्राम सन्ना के खसरा नंबर 1204 (रकबा 0.0570 हे.) की भूमि शासकीय घोषित है। इस पर अशोक गुप्ता पिता रामेश्वर गुप्ता द्वारा भवन निर्माण किया जा रहा था। ग्राम पंचायत सन्ना ने 19 अक्टूबर 2025 को ही निर्माण पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था, बावजूद इसके निर्माण कार्य जारी रहा।
28 अक्टूबर को जब सूचना मिली कि निर्माण दोबारा शुरू हो गया है, तहसीलदार रोशनी तिर्की मौके पर पहुँचीं और निर्माण रोकने का निर्देश दिया।
इसी दौरान राकेश गुप्ता और अशोक गुप्ता ने कथित रूप से अभद्रता, जातिसूचक टिप्पणी और धमकी दी।
तहसीलदार ने बाद में थाना सन्ना में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि थानेदार ने न तो आवेदन की रसीद दी और न ही उनकी बात सुनी। उन्होंने कहा कि थाने में भी उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ।
आदिवासी समाज में आक्रोश
तहसीलदार रोशनी तिर्की उरांव जनजाति से हैं।
घटना के बाद आदिवासी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
“यह केवल एक महिला अधिकारी का नहीं, पूरे आदिवासी समाज के सम्मान का सवाल है।
यदि दोषियों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं हुई, तो समाज चक्का जाम और थाना घेराव करेगा।”
— आदिवासी महासभा प्रतिनिधि
संगठनों ने संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय जांच की मांग भी की है।
वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत उपाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण में तहसीलदार को कठघरे में खड़ा किया है।
“तहसीलदार द्वारा हमारे जनपद सदस्य राकेश गुप्ता से दुर्व्यवहार और उन्हें आदिवासी एक्ट में फँसाने की धमकी निंदनीय है।
हम तहसीलदार के निलंबन की मांग करेंगे।”
— अरविंद गुप्ता, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत
उन्होंने सभी DDC, BDC, सरपंच व जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया है कि वे मिलकर तहसील सन्ना का घेराव करें।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ भूमि विवाद नहीं, बल्कि
“सामाजिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक निष्पक्षता दोनों की परीक्षा है।”




