जशपुर का रामतिल पहुँचा विदेश — अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया तक बढ़ी मांग
October 6, 2025
प्रभा यादव
जशपुरनगर-
छत्तीसगढ़ का खूबसूरत हिल स्टेशन जशपुरांचल न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अब कृषि उत्पादों के क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान बना रहा है। यहां उगाई जाने वाली रामतिल की फसल (जिसे स्थानीय बोली में जटंगी या गुंजा कहा जाता है) आज विश्व बाजार में अपनी जगह बना चुकी है।
नेहरू सोनी ने बताया – जशपुर के किसानों द्वारा उत्पादित रामतिल अब न केवल छत्तीसगढ़ या भारत के अन्य राज्यों में, बल्कि अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को भी निर्यात किया जा रहा है। विदेशों में इसकी गुणवत्ता और शुद्धता की काफी मांग है। यह जशपुर जिले और प्रदेश दोनों के लिए गौरव की बात है।
कड़ाके की ठंड और पहाड़ी इलाकों की उपजाऊ मिट्टी रामतिल की खेती के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रही है। किसान खाली पड़ी जमीनों में भी इसकी बंपर पैदावार ले रहे हैं। रामतिल से खाने योग्य तेल के साथ-साथ औषधीय उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं, जो सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक माने जाते हैं।
सुबह की पहली किरणों के बीच जब खेतों में नजर दौड़ाई जाती है, तो सुनहरी पीले रंग की मखमली चादर जैसे दृश्य मन को सुकून दे जाते हैं। यही कारण है कि लोग कहते हैं।
“शहर में तो बारूदों का मौसम है, आओ जशपुर चले… यहां गुंजा का मौसम है।”
जशपुर की धरती एक बार फिर यह साबित कर रही है कि यहां की प्राकृतिक संपदा और मेहनतकश किसान मिलकर जिले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहे हैं।
जशपुरनगर-
छत्तीसगढ़ का खूबसूरत हिल स्टेशन जशपुरांचल न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अब कृषि उत्पादों के क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान बना रहा है। यहां उगाई जाने वाली रामतिल की फसल (जिसे स्थानीय बोली में जटंगी या गुंजा कहा जाता है) आज विश्व बाजार में अपनी जगह बना चुकी है।
नेहरू सोनी ने बताया – जशपुर के किसानों द्वारा उत्पादित रामतिल अब न केवल छत्तीसगढ़ या भारत के अन्य राज्यों में, बल्कि अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को भी निर्यात किया जा रहा है। विदेशों में इसकी गुणवत्ता और शुद्धता की काफी मांग है। यह जशपुर जिले और प्रदेश दोनों के लिए गौरव की बात है।
कड़ाके की ठंड और पहाड़ी इलाकों की उपजाऊ मिट्टी रामतिल की खेती के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रही है। किसान खाली पड़ी जमीनों में भी इसकी बंपर पैदावार ले रहे हैं। रामतिल से खाने योग्य तेल के साथ-साथ औषधीय उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं, जो सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक माने जाते हैं।
सुबह की पहली किरणों के बीच जब खेतों में नजर दौड़ाई जाती है, तो सुनहरी पीले रंग की मखमली चादर जैसे दृश्य मन को सुकून दे जाते हैं। यही कारण है कि लोग कहते हैं।
“शहर में तो बारूदों का मौसम है, आओ जशपुर चले… यहां गुंजा का मौसम है।”
जशपुर की धरती एक बार फिर यह साबित कर रही है कि यहां की प्राकृतिक संपदा और मेहनतकश किसान मिलकर जिले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहे हैं।



