डीएवी स्कूल बचेली में हंगामा: “तानाशाही मैडम” के खिलाफ सड़कों पर शिक्षक, बेहोश हुई शिक्षिका
September 29, 2025
एनएमडीसी के आश्वासन पर शांत हुआ गुस्सा, जनप्रतिनिधियों ने कहा— बच्चों का भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे
बचेली:- डीएवी स्कूल छत्तीसगढ़ बचेली को रणभूमि बना दिया गया है। प्राचार्या चेतना शर्मा की कथित तानाशाही से त्रस्त शिक्षक आखिरकार सड़क पर उतर आए। हालत इतनी बेकाबू हुई कि एक महिला शिक्षिका मानसिक दबाव सह न सकीं और वहीं बेहोश हो गईं। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाना पड़ा।
पाँच साल से “विवादों की फैक्ट्री”
शिक्षकों का कहना है कि चेतना शर्मा पिछले पाँच वर्षों से मानो विवाद पैदा करने की मशीन बन चुकी हैं। गरीब बच्चों को जलील करना, स्टाफ से घरेलू सामान मँगवाना, टॉयलेट साफ करवाना और शिक्षकों को छोटी-छोटी बातों पर नीचा दिखाना, अब उनकी आदत बन चुकी है।
बच्चों तक को बख्शा नहीं
एक नन्हे छात्र ने कैमरे के सामने रोते-रोते कहा— “मैडम ने मेरी माँ को डायन कहा और मुझे स्कूल से निकाल दिया। बोलीं— तुम्हारी औक़ात नहीं है यहाँ पढ़ने की।”
यह सुनते ही मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए।
डर और धमकी की राजनीति
आरोप है कि मैडम खुलकर धमकियाँ देती थीं— “अगर आवाज उठाई तो नौकरी से निकाल दूँगी, वरना झूठे महिला अपराधों में फँसा दूँगी।” शिक्षक लंबे समय से सहते-सहते थक चुके थे।
प्रबंधन की नींद टूटी विरोध से
11 नवंबर को 27 शिक्षकों ने एनएमडीसी प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई तो दूर, जवाब तक नहीं मिला। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो शिक्षक विरोध करने मजबूर हो गए।
नेताओं की एंट्री और प्राचार्या की चुप्पी
स्थिति बिगड़ते देख पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल और उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी पहुँचे। दोनों ने शिक्षकों की बातें सुनीं और एनएमडीसी अफसरों को आड़े हाथों लिया। इसके बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि चेतना शर्मा पर जाँच होगी और फिलहाल उन्हें स्कूल आने से रोका जाएगा।
मगर हैरत की बात यह रही कि जब जनप्रतिनिधियों ने चेतना शर्मा से पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कह दिया— “मैं डिप्रेशन की दवाइयाँ ले रही हूँ, इसलिए कोई बात नहीं करूँगी।”
लोगों ने तंज कसा— “यदि खुद मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं तो बच्चों और शिक्षकों का जीवन क्यों तबाह कर रही हैं?”
आंदोलन की खुली चेतावनी
पालिका अध्यक्ष जायसवाल और उपाध्यक्ष प्रेमचंदानी ने साफ कहा—
“शिक्षकों को पीड़ा देकर शिक्षा का माहौल खराब नहीं होने देंगे। अगर प्राचार्या को तुरंत नहीं हटाया गया तो बचेली में ऐसा आंदोलन होगा कि प्रबंधन की कुर्सियाँ हिल जाएँगी।”
बचेली:- डीएवी स्कूल छत्तीसगढ़ बचेली को रणभूमि बना दिया गया है। प्राचार्या चेतना शर्मा की कथित तानाशाही से त्रस्त शिक्षक आखिरकार सड़क पर उतर आए। हालत इतनी बेकाबू हुई कि एक महिला शिक्षिका मानसिक दबाव सह न सकीं और वहीं बेहोश हो गईं। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाना पड़ा।
पाँच साल से “विवादों की फैक्ट्री”
शिक्षकों का कहना है कि चेतना शर्मा पिछले पाँच वर्षों से मानो विवाद पैदा करने की मशीन बन चुकी हैं। गरीब बच्चों को जलील करना, स्टाफ से घरेलू सामान मँगवाना, टॉयलेट साफ करवाना और शिक्षकों को छोटी-छोटी बातों पर नीचा दिखाना, अब उनकी आदत बन चुकी है।
बच्चों तक को बख्शा नहीं
एक नन्हे छात्र ने कैमरे के सामने रोते-रोते कहा— “मैडम ने मेरी माँ को डायन कहा और मुझे स्कूल से निकाल दिया। बोलीं— तुम्हारी औक़ात नहीं है यहाँ पढ़ने की।”
यह सुनते ही मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए।
डर और धमकी की राजनीति
आरोप है कि मैडम खुलकर धमकियाँ देती थीं— “अगर आवाज उठाई तो नौकरी से निकाल दूँगी, वरना झूठे महिला अपराधों में फँसा दूँगी।” शिक्षक लंबे समय से सहते-सहते थक चुके थे।
प्रबंधन की नींद टूटी विरोध से
11 नवंबर को 27 शिक्षकों ने एनएमडीसी प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई तो दूर, जवाब तक नहीं मिला। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो शिक्षक विरोध करने मजबूर हो गए।
नेताओं की एंट्री और प्राचार्या की चुप्पी
स्थिति बिगड़ते देख पालिका अध्यक्ष राजू जायसवाल और उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी पहुँचे। दोनों ने शिक्षकों की बातें सुनीं और एनएमडीसी अफसरों को आड़े हाथों लिया। इसके बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि चेतना शर्मा पर जाँच होगी और फिलहाल उन्हें स्कूल आने से रोका जाएगा।
मगर हैरत की बात यह रही कि जब जनप्रतिनिधियों ने चेतना शर्मा से पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कह दिया— “मैं डिप्रेशन की दवाइयाँ ले रही हूँ, इसलिए कोई बात नहीं करूँगी।”
लोगों ने तंज कसा— “यदि खुद मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं तो बच्चों और शिक्षकों का जीवन क्यों तबाह कर रही हैं?”
आंदोलन की खुली चेतावनी
पालिका अध्यक्ष जायसवाल और उपाध्यक्ष प्रेमचंदानी ने साफ कहा—
“शिक्षकों को पीड़ा देकर शिक्षा का माहौल खराब नहीं होने देंगे। अगर प्राचार्या को तुरंत नहीं हटाया गया तो बचेली में ऐसा आंदोलन होगा कि प्रबंधन की कुर्सियाँ हिल जाएँगी।”



